दशगुणं स्वगृहे दानम्, शतगुणं गोशालायां,सहस्रगुणं तीर्थेषु, अनन्तफलं शिवलिंगे

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संक्षिप्त परिचय

'श्री राधेश्याम गौशाला समिति' गौसेवकों का अलाभकारी पंजीकृत संगठन है। हमारी विचारधारा के अनुसार: 33 कोटि देवी देवताओं की विद्यमानता वाले गौमाता के पुण्य और पवित्र शरीर हेतु मात्र असुविधाजनक आवास और अपर्याप्त भोजन की व्यवस्था कर देने मात्र से मानवजाति के कर्तव्यों की इतिश्री नहीं हो सकती है।

गौमाता की सेवा का एकमात्र माध्यम मनुष्य ही है। 'श्री राधेश्याम गौशाला समिति' का मुख्य उद्देश्य ऐसी व्यवस्था का निर्माण करना है जिससे भौतिकतावादी मनुष्य की स्वार्थपूर्ति का मार्ग गौसेवा से होकर निकले और दोनों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त हो सके।

गौमाता के जीवनस्तर में सुधार के प्रयास हेतु समिति कई प्रकार की योजनाओं के सुचारु क्रियान्वयन की ओर अग्रसर है। समिति का लक्ष्य है कि हमारे चींटी मात्र प्रयास से गौमाता गौशाला में अपनी मृत्यु की प्रतीक्षा करने के स्थान पर जीवन का आनंद प्राप्त कर समस्त मानवजाति को शुभाशीष दे सकें।

मुख्य विशेषताएं

ये चार सेवाएं हमको विश्व की सभी अन्य गौशालाओ से भिन्न करती हैं।

समिति के सुव्यवस्थित संचालन हेतु

दो प्रकार के दान की व्यवस्था की गयी है।

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गुप्त दान

आर्थिक रूप से संपन्न सज्जनों हेतु गौशाला ने गुप्तदान की व्यवस्था की है, जिसके अंतर्गत गौप्रेमी सज्जन अपनी इच्छानुसार ऑनलाइन दान कर गौसेवा के इस पुण्य कार्य में सहयोग कर सकते हैं। इसके लिए दान-दाता ऊपर दिए गए 'दान करें' बटन पर क्लिक करके स्वेच्छा से अपना विवरण समिति को उपलब्ध कराकर दान कर ऑनलाइन रसीद प्राप्त कर सकते हैं। इसमें आपके विवरण संबंधी किसी प्रकार की कोई बाध्यता नहीं है।

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प्रसादम व्यवस्था

इस व्यवस्था के अंतर्गत समिति एक पूर्वनिर्धारित अत्यंत न्यूनतम दान की राशि ₹151/- आपसे प्राप्त करती है। इस व्यवस्था के अंतर्गत दान करने के लिए आपको समिति की वेबसाइट पर उपलब्ध 'रजिस्टर' बटन पर क्लिक कर अपने मोबाइल नंबर के माध्यम से दान करके पंजीकरण कराना होगा। इसके तुरंत बाद आपको दान रसीद प्राप्त होगी, जिसके अंदर आपका 'गौसेवक आईडी' और 'पासवर्ड' आपको प्राप्त हो जाएगा। इन दोनों की सहायता से आप गौसेवक लॉगिन करके अपनी समस्त जानकारी समिति को उपलब्ध करा देते हैं।

दान प्रसादम व्यवस्था

”समृद्ध गौशाला” योजना

इस योजना का निर्माण उन सभी गौशालाओं हेतु किया गया है जो आर्थिक तंगी, अव्यवस्था और तकनीक के अभाव से ग्रस्त है। ऐसे सभी इच्छुक गौशाला संचालको से निवेदन है कि अपना पूर्ण विवरण हमारे सहायता केंद्र अथवा ईमेल के माध्यम से समिति तक पहुंचाएं जिसमे सम्पूर्ण विवरण के साथ यह भी अवश्य वर्णित करें की आपको समिति से क्या अपेक्षाएं हैँ। समिति अपने स्तर पर आपके विवरण की जांच करके अग्रिम निर्णय करेगी।

नोट:- यह योजना श्री राधेश्याम गौशाला समिति (रजि0) द्वारा संचालित एक प्रयास मात्र है किसी भी गौशाला संचालक का यह अधिकार नहीं है।

'खर्च हमारा' योजना

इस योजना का निर्माण उन गौपालकों को ध्यान में रखकर किया गया है जिनकी स्वंय की आर्थिक स्थिति सही नहीं है, गौमाता दूध नहीं देती है और पशुपालक गौमाता के चारे इत्यादि का प्रबंध करने में असमर्थ हैं।ऐसे गौपालकों से निवेदन है की गौमाता को अपने परिवार का सदस्य समझकर अपने घर पर ही रखकर सेवा करें उनके चारे की व्यवस्था यथायोग्य समिति करने का प्रयास करेगी।आप अपना पूर्ण विवरण समिति को उपलब्ध कराएं ताकि समिति आपके प्रकरण की जांच करके अग्रिम निर्णय ले सके।

नोट:- यह योजना श्री राधेश्याम गौशाला समिति (रजि0) द्वारा संचालित एक प्रयास मात्र है किसी भी पशुपालक का यह अधिकार नहीं है।

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हमारा उद्देश्य

समिति का लक्ष्य वर्ष 2030 तक पांच लाख गौमाताओं को एकत्रित कर विश्व की सबसे बड़ी,अत्याधुनिक और सभी सुविधाओं से युक्त गौशाला का निर्माण करना है। इस गौशाला में गौमाताएं न केवल सुरक्षित रहेंगी बल्कि उन्हें एक स्वस्थ और खुशहाल जीवन जीने के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। हमारा लक्ष्य है कि गौमाताएं यहां आकर जीवन का आनंद ले सकें और उन्हें मृत्यु का इंतजार न करना पड़े।

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हमारा दृष्टिकोण

प्राचीनकाल में 'गोपालन' भारतीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग हुआ करता था। गौमाता लगभग प्रत्येक घर का गौरव थी। गौपालन को आधुनिकता और तकनीक से जोड़कर एक ऐसा मॉडल तैयार करना, जिससे शिक्षित, आधुनिक, भौतिकतावादी और अत्यधिक व्यस्त युवा पीढ़ी गौमाता के महत्त्व को समझकर गौपालन व्यवसाय को निसंकोच ग्रहण कर सके और गोपालन पुनः भारतीय अर्थव्यवस्था का अभिन्न एवं महत्वपूर्ण अंग बने और स्वस्थ समाज का निर्माण हो।

आइए साथ मिलकर खड़े हों

गौसेवा के साथ-साथ “नर सेवा - नारायण सेवा”
Nar Seva-Narayan Seva

के भाव से ₹151/- का दान देकर 'दान और संगठन' की शक्ति से साक्षात्कार करते हुए गौसेवा के क्षेत्र मे

होने जा रहे क्रांतिकारी परिवर्तन मे सहयोगी बनें।